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Bematlab Ki Chahat Shayari

Bematlab Ki Chahat Shayari

दर्द भी वही और राहत भी वही,
मेरी मुश्किलें और, बुरी आदत भी वही
उसे भूलना हर सहर मक़सद है मेरा
हर सुबह फ़िर बेमतलब सी चाहत भी वही

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